Poetry Showcase by Soni Jha
माँ का दरबार रचनाकार: सोनी झा नवरात्रि का त्योहार जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा लेकर आता है इस त्योहार में माँ के नौ रूपों की उपासना की जाती है। इसी पर आधारित है एक स्वरचित कविता — “माँ का दरबार”। आ गया है नवरात्रि का पावन त्योहा सज गया है माता का हर दरबार। इन नौ दिनों में माता की उपासना होती है, जलती है हर घर में माँ के नाम की ज्योति है। सजती है पूजा की थाल, हर संकट को माँ देती है टाल। पुष्प अर्पण, भजन-कीर्तन से भक्त अपनी आस्था को प्रकट करते हैं। हो जाए सबके जीवन में सुख-शांति, ऐसी कामना माँ से करते हैं। माँ के नौ रूप बड़े निराले हैं, जिसमें हैं — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। जिनके आगे झुक जाते ब्रह्मा, विष्णु और महेश देव सारे हैं। माँ की कृपा से होता है जग रोशन, आओ सब मिलकर करें माँ का वंदन।